Message Schedule List : 12,252
| S. No. | Message | Language | Created By | Date | Time | Status | Action |
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| 11151 | বতৰৰ বতৰা আৰু আমাৰ পৰামৰ্শ VI Smart Agri Project ৰ প্ৰিয় ট্ৰিনিটি ক্ষুদ্ৰ চাহ খেতিয়ক । স্মাৰ্ট কৃষি পৰামৰ্শলৈ স্বাগতম। আমাৰ বতৰ বিজ্ঞান কেন্দ্ৰৰ পৰা পোৱা বতৰৰ আগলি বতৰা অনুযায়ী অহা সপ্তাহত সংশ্লিষ্ট জিলাবোৰত, বতৰ সাধাৰণতে ডাৱৰীয়া হৈ থাকিব আৰু পাতলৰ পৰা মধ্যমীয়া বৰষুণ হোৱাৰ সম্ভাৱনা থাকিব। পৰৱৰ্তী ৭ দিনৰ বাবে সৰ্বাধিক তাপমাত্ৰা প্ৰায় ২৭°চে.ৰ পৰা ৩৬°চে. আৰু নিম্নতম তাপমাত্ৰা প্ৰায় ২৫° চে.ৰ পৰা ২৭° চে. হব বুলি অনুমান কৰা হৈছে। ৰাতিপুৱা আৰু আবেলিৰ আপেক্ষিক আৰ্দ্ৰতা ক্ৰমান্বয়ে প্ৰায় ৯৯% আৰু ৮০% ৰ আশে-পাশে থাকিব। বতাহ গড়ে প্ৰতি ঘণ্টাত প্ৰায় ৪-১০ কিলোমিটাৰ বেগত প্ৰবাহিত হব। বানত বেয়াকৈ ক্ষতিগ্ৰস্ত হোৱা চাহ গছ বোৰত গছবোৰ পুনৰুজ্জীৱিত নোহোৱালৈকে বা নতুন পাত ওলোৱা আৰম্ভ নোহোৱালৈকে প্লাকিং কেইদিনমানৰ বাবে বন্ধ ৰখা উচিত। যেতিয়া আকৌ নতুনকৈ পাত ওলাব ধৰে তেতিয়াহে এটা বা দুটা পাতৰ ওপৰত তুলিব লাগিব যাতে গছে পাতৰ জৰিয়তে খাদ্য গ্ৰহণ কৰিব পাৰে।মৰি যোৱা ডাল বোৰ কাটি পেলাব লাগে আৰু কটা ডালৰ মুখত Indopaste লগাব ।এই সময়ত বিশেষকৈ Helopeltis , Aphids, Flush worms , Green flies ,Red Spider আদি পোক-পতংগৰ আক্ৰমণ দেখা যায় । একেদৰে কিছুমান অঞ্চলত প্ৰতিকূল বতৰত Red Rust আৰু Black Rotৰ আক্ৰমণো লক্ষ্য কৰিব পাৰে। এই ৰোগবোৰ সাধাৰণতে মাটিৰ পুষ্টিৰ অভাৱ আৰু পানী জমা হোৱাৰ পিছত দেখা যায়। পানী জমা এলেকাবোৰত প্ৰয়োজনীয় ব্যৱধানত সৰু নলাৰ ব্যৱস্থা কৰিব । সংক্ৰমিত এলেকাবোৰ চিহ্নিত কৰি প্লাকিং কৰাৰ পিছত অনুমোদিত ৰাসায়নিক পদাৰ্থৰ স্পট স্প্ৰে (Spot spraying) কৰি নিয়ন্ত্ৰণ কৰিব। চাহ বাগিচাত পোক-পতংগ দেখা পোৱাৰ লগে লগে "Search and Kill" পদ্ধতি সম্পন্ন কৰাটো গুৰুত্বপূৰ্ণ। এই পদ্ধতিটোৱে চেকেন্ড ফ্লাশৰ সময়ত ভাল চাহ পাত পোৱাত সহায় কৰে। পাচলিশস্য যেনে লাও, জিকা, ভাত কেৰেলাত প্ৰতিকূল বতৰৰ বাবে Fruit fly, Epilachna beetle, Leaf Hopper আদিৰ আক্ৰমণ হব পাৰে। কীট নিয়ণ্ত্ৰণ কৰিবলৈ লেম্বডা চাইহেলোথ্ৰিন ৫ ইচি (@ প্ৰতি ১০ লিটাৰ পানীত ৩-৫ মিলি) বা এমামেক্টিন বেনজোয়েট ৫% এছজি (@ ৫ গ্ৰাম প্ৰতি ১০ লিটাৰ পানীত ) বৰষুণ মুক্ত সময়ত স্প্ৰে কৰিব। ধন্যবাদ। | Marathi | Assam | 30-06-2022 | 08:00:00 | SCHEDULED |
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| 11152 | జైనాద్ మండల రైతు సోదరులకు సూచన :: సోలిడరిడాడ్ వారి ఆధునిక ఆటోమేటెడ్ వాతావరన కేంద్ర సమాచారము మేరకు, గత వారం లో కురిసిన వాన 34 మిల్లీ లీటర్లు గా ఉంది. ఇది కురవ వలసిన దాని కంటే 60% తక్కువ. వచ్చే వారం సైతం వానలు కురిసే అవకాశం 40-88% మాత్రమే. కావున అవకాశం ఉన్న రైతులు మొలిచిన విత్తనానికి నీరు అందించాలి. తగిన వర్షం వచ్చాకే కొత్త పంటను విత్తుకోవాలి. ఇట్లు సాలిడేరిడాడ్ ఆసియా | Marathi | Telangana | 29-06-2022 | 10:15:00 | SCHEDULED |
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| 11153 | कापसाचे पीक हे जास्त कालावधीचे पीक आहे. कपाशीच्या बियाण्याची उगवण होण्यासाठी १८ ते २० अंश सेल्सिअस, अधिक वाढ होण्यासाठी २० ते २७ अंश सेल्सिअस इतक्या तापमानाची आवश्यकता असते. कापसामध्ये सामान्यतः मूग व उडीद ही पिके आंतरपिक म्हणून घेतली जातात. याव्यतिरिक्त चवळी, झेंडू व तूर ही पिकेही आंतरपिक म्हणून परिणामकारक आणि फायदेशीर ठरतात. झेंडू किंवा तुरीच्या काही ओळींची लागवड केल्यास कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव कमी करण्यास मदत होते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीसुद्धा कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव ईटीएल पेक्षा कमी करण्यास अतिशय फायदेशीर ठरते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीमुळे जास्तीत जास्त उत्पादन, कमीत कमी कीटक समस्या व मातीची सुपीकता राखण्यास अतिशय उपयुक्त ठरते. | Telugu | MH | 29-06-2022 | 08:30:00 | SCHEDULED |
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| 11154 | कापसाचे पीक हे जास्त कालावधीचे पीक आहे. कपाशीच्या बियाण्याची उगवण होण्यासाठी १८ ते २० अंश सेल्सिअस, अधिक वाढ होण्यासाठी २० ते २७ अंश सेल्सिअस इतक्या तापमानाची आवश्यकता असते. कापसामध्ये सामान्यतः मूग व उडीद ही पिके आंतरपिक म्हणून घेतली जातात. याव्यतिरिक्त चवळी, झेंडू व तूर ही पिकेही आंतरपिक म्हणून परिणामकारक आणि फायदेशीर ठरतात. झेंडू किंवा तुरीच्या काही ओळींची लागवड केल्यास कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव कमी करण्यास मदत होते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीसुद्धा कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव ईटीएल पेक्षा कमी करण्यास अतिशय फायदेशीर ठरते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीमुळे जास्तीत जास्त उत्पादन, कमीत कमी कीटक समस्या व मातीची सुपीकता राखण्यास अतिशय उपयुक्त ठरते. | Telugu | MH | 29-06-2022 | 08:30:00 | SCHEDULED |
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| 11155 | कापसाचे पीक हे जास्त कालावधीचे पीक आहे. कपाशीच्या बियाण्याची उगवण होण्यासाठी १८ ते २० अंश सेल्सिअस, अधिक वाढ होण्यासाठी २० ते २७ अंश सेल्सिअस इतक्या तापमानाची आवश्यकता असते. कापसामध्ये सामान्यतः मूग व उडीद ही पिके आंतरपिक म्हणून घेतली जातात. याव्यतिरिक्त चवळी, झेंडू व तूर ही पिकेही आंतरपिक म्हणून परिणामकारक आणि फायदेशीर ठरतात. झेंडू किंवा तुरीच्या काही ओळींची लागवड केल्यास कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव कमी करण्यास मदत होते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीसुद्धा कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव ईटीएल पेक्षा कमी करण्यास अतिशय फायदेशीर ठरते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीमुळे जास्तीत जास्त उत्पादन, कमीत कमी कीटक समस्या व मातीची सुपीकता राखण्यास अतिशय उपयुक्त ठरते. | Telugu | MH | 29-06-2022 | 08:30:00 | SCHEDULED |
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| 11156 | कापसाचे पीक हे जास्त कालावधीचे पीक आहे. कपाशीच्या बियाण्याची उगवण होण्यासाठी १८ ते २० अंश सेल्सिअस, अधिक वाढ होण्यासाठी २० ते २७ अंश सेल्सिअस इतक्या तापमानाची आवश्यकता असते. कापसामध्ये सामान्यतः मूग व उडीद ही पिके आंतरपिक म्हणून घेतली जातात. याव्यतिरिक्त चवळी, झेंडू व तूर ही पिकेही आंतरपिक म्हणून परिणामकारक आणि फायदेशीर ठरतात. झेंडू किंवा तुरीच्या काही ओळींची लागवड केल्यास कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव कमी करण्यास मदत होते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीसुद्धा कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव ईटीएल पेक्षा कमी करण्यास अतिशय फायदेशीर ठरते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीमुळे जास्तीत जास्त उत्पादन, कमीत कमी कीटक समस्या व मातीची सुपीकता राखण्यास अतिशय उपयुक्त ठरते. | Telugu | MH | 29-06-2022 | 08:30:00 | SCHEDULED |
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| 11157 | कापसाचे पीक हे जास्त कालावधीचे पीक आहे. कपाशीच्या बियाण्याची उगवण होण्यासाठी १८ ते २० अंश सेल्सिअस, अधिक वाढ होण्यासाठी २० ते २७ अंश सेल्सिअस इतक्या तापमानाची आवश्यकता असते. कापसामध्ये सामान्यतः मूग व उडीद ही पिके आंतरपिक म्हणून घेतली जातात. याव्यतिरिक्त चवळी, झेंडू व तूर ही पिकेही आंतरपिक म्हणून परिणामकारक आणि फायदेशीर ठरतात. झेंडू किंवा तुरीच्या काही ओळींची लागवड केल्यास कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव कमी करण्यास मदत होते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीसुद्धा कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव ईटीएल पेक्षा कमी करण्यास अतिशय फायदेशीर ठरते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीमुळे जास्तीत जास्त उत्पादन, कमीत कमी कीटक समस्या व मातीची सुपीकता राखण्यास अतिशय उपयुक्त ठरते. | Telugu | MH | 29-06-2022 | 08:30:00 | SCHEDULED |
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| 11158 | कापसाचे पीक हे जास्त कालावधीचे पीक आहे. कपाशीच्या बियाण्याची उगवण होण्यासाठी १८ ते २० अंश सेल्सिअस, अधिक वाढ होण्यासाठी २० ते २७ अंश सेल्सिअस इतक्या तापमानाची आवश्यकता असते. कापसामध्ये सामान्यतः मूग व उडीद ही पिके आंतरपिक म्हणून घेतली जातात. याव्यतिरिक्त चवळी, झेंडू व तूर ही पिकेही आंतरपिक म्हणून परिणामकारक आणि फायदेशीर ठरतात. झेंडू किंवा तुरीच्या काही ओळींची लागवड केल्यास कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव कमी करण्यास मदत होते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीसुद्धा कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव ईटीएल पेक्षा कमी करण्यास अतिशय फायदेशीर ठरते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीमुळे जास्तीत जास्त उत्पादन, कमीत कमी कीटक समस्या व मातीची सुपीकता राखण्यास अतिशय उपयुक्त ठरते. | Telugu | MH | 29-06-2022 | 08:30:00 | SCHEDULED |
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| 11159 | कापसाचे पीक हे जास्त कालावधीचे पीक आहे. कपाशीच्या बियाण्याची उगवण होण्यासाठी १८ ते २० अंश सेल्सिअस, अधिक वाढ होण्यासाठी २० ते २७ अंश सेल्सिअस इतक्या तापमानाची आवश्यकता असते. कापसामध्ये सामान्यतः मूग व उडीद ही पिके आंतरपिक म्हणून घेतली जातात. याव्यतिरिक्त चवळी, झेंडू व तूर ही पिकेही आंतरपिक म्हणून परिणामकारक आणि फायदेशीर ठरतात. झेंडू किंवा तुरीच्या काही ओळींची लागवड केल्यास कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव कमी करण्यास मदत होते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीसुद्धा कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव ईटीएल पेक्षा कमी करण्यास अतिशय फायदेशीर ठरते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीमुळे जास्तीत जास्त उत्पादन, कमीत कमी कीटक समस्या व मातीची सुपीकता राखण्यास अतिशय उपयुक्त ठरते. | Telugu | MH | 29-06-2022 | 08:30:00 | SCHEDULED |
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| 11160 | कापसाचे पीक हे जास्त कालावधीचे पीक आहे. कपाशीच्या बियाण्याची उगवण होण्यासाठी १८ ते २० अंश सेल्सिअस, अधिक वाढ होण्यासाठी २० ते २७ अंश सेल्सिअस इतक्या तापमानाची आवश्यकता असते. कापसामध्ये सामान्यतः मूग व उडीद ही पिके आंतरपिक म्हणून घेतली जातात. याव्यतिरिक्त चवळी, झेंडू व तूर ही पिकेही आंतरपिक म्हणून परिणामकारक आणि फायदेशीर ठरतात. झेंडू किंवा तुरीच्या काही ओळींची लागवड केल्यास कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव कमी करण्यास मदत होते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीसुद्धा कीड व कीटकांचा प्रादुर्भाव ईटीएल पेक्षा कमी करण्यास अतिशय फायदेशीर ठरते. तसेच बहूआंतरपिक पद्धतीमुळे जास्तीत जास्त उत्पादन, कमीत कमी कीटक समस्या व मातीची सुपीकता राखण्यास अतिशय उपयुक्त ठरते. | Telugu | MH | 29-06-2022 | 08:30:00 | SCHEDULED |
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